इसी साल शुरू होगा रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन, मंत्री ने खुद कर दिया एलान; चीन पर कम होगी निर्भरता : जी,किशन रेड्डी (केंद्रीय कैबिनेट मंत्री )
Production of Rare Earth Magnets will begin this Year
( अर्थ प्रकाश / बोम्मा रेडड्डी )
नई दिल्ली : : भारत ने वैश्विक खनिज राजनीति के क्षेत्र में एक बड़ा दांव खेला है. केंद्रीय खान और कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी से चर्चा के दौरान उन्होंने वार्ता के दौरान समाचार पत्र को जवाब मैं बताया कि ... भारत 2026 के अंत तक घरेलू स्तर पर रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आर ए पी एम) का उत्पादन शुरू कर देगा. यह कदम न केवल रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि उच्च तकनीक वाली सामग्रियों के लिए चीन पर भारत की दशकों पुरानी निर्भरता को भी लगभग समाप्त कर देगा.
प्रश्न .. रणनीतिक महत्व और चीनी एकाधिकार
उत्तर .. वर्तमान में, दुनिया के लगभग 90% रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादन और प्रसंस्करण पर चीन का नियंत्रण है. ये मैग्नेट आधुनिक दुनिया के लिए 'नया तेल' माने जाते हैं क्योंकि इनके बिना इलेक्ट्रिक वाहन (ई वी), विंड टर्बाइन, स्मार्टफोन, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और रडार का निर्माण असंभव है. चीन द्वारा हाल ही में इन मैग्नेट के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भारत ने अपनी घरेलू उत्पादन क्षमता को तेजी से बढ़ाने का निर्णय लिया है.
प्र. सरकार का मास्टर प्लान और भारी निवेश
उ. इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्र सरकार ने ₹7,280 करोड़ की एक व्यापक प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है. इस योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
उत्पादन लक्ष्य: भारत का लक्ष्य प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन मैग्नेट का उत्पादन करना है.
प्रोत्साहन राशि: योजना में ₹6,450 करोड़ का 'सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव' (बिक्री आधारित प्रोत्साहन) और ₹750 करोड़ की 'कैपिटल सब्सिडी' शामिल है.
प्रोसेसिंग पार्क्स: खनिज प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में चार विशेष 'क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पार्क' स्थापित किए जाएंगे.
रेयर अर्थ कॉरिडोर: बजट 2026 में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' बनाने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि खनन से लेकर विनिर्माण तक की एक पूरी श्रृंखला तैयार हो सके.
स्वदेशी तकनीक और भंडार का लाभ
भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार (लगभग 6.9 मिलियन टन) मौजूद है. अब तक तकनीक के अभाव में हम केवल कच्चे माल तक सीमित थे. हालांकि, अब खान मंत्रालय और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (जैसे NFTDC) ने इन मैग्नेट को बनाने की स्वदेशी तकनीक विकसित कर ली है. सरकार अब इस तकनीक को निजी उद्योगों के साथ साझा कर रही है ताकि बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जा सके.
प्र. किन उद्योगों को होगा सीधा लाभ?
उ. घरेलू मैग्नेट उत्पादन से भारत के EV सेक्टर की लागत में भारी कमी आएगी. साथ ही, रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्रों में विदेशी हस्तक्षेप का जोखिम कम होगा.